बुधवार, 20 जनवरी 2010
सीरियल निर्माताओं ने दर्शको को पक्का मूर्ख समझ रखा है.कोई भी सीरियल देख लीजिये उदाहरण सामने आ जाएगा.महिला को गिरफ्तार करने का सीन है देर रात पुरुष पुलिसकर्मी महिला को गिरफ्ता करने हाज़िर हो गए.सीने पर तीन-चार गोलिया खाने के बाद भी किरदार ज़िंदा रह जाता है.कुलदेवी की पूजा के समय घर की बहू के स्थान पर बाहरी औरत बैठा दी जाती है और कोई भांप नहीं पाता.टी.वी पर चल रहे इन ऊट-पटांग सीरियल को देखकर एक बच्चे के दिमाग में भी स्वाभाविक रूप से प्रश्न जन्म लेते हैं फिर यह कैसे मान लिया जाए की निर्माताओं द्वारा ऐसी चूक कैसे हो जाती है?सीरियल में कुछ स्वाभाविक सीन दिखा देने से इनकी क्वालिटी में सुधार ही आयेगा यह मोटी बात निर्माताओं की समझ में आ जाए तो दर्शको के साथ उनका भी भला होगा.
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
